मंगलवार, 5 फ़रवरी 2019

दो पहियों पर पूर्वोत्तर : छठा पड़ाव : काजीरंगा नेशनल पार्क, कोहरा

28 नवंबर 2018 बुधवार
गोहाटी

आज केवल दो सौ कीलोमीटर जाना था सो आराम से देर तक सोता रहा। आराम से दस बजे तक सोता रहा फिर हाथ मुंह धोकर मोटरसाइकिल उठाया और बाहर निकला। इरादा था कि उमानंद मंदिर जाया जाए। यह मंदिर ब्रह्मपुत्र नदी के बीचो-बीच एक टापू पर है। नाव वाले यहां तक आने जाने का किराया ₹100 लेते हैं। मुझे मंदिर में कुछ कोई खास दिलचस्पी नहीं थी। केवल ब्रह्मपुत्र का आनंद लेना था। मैं मोटरसाइकिल लेकर ब्रह्मपुत्र के किनारे किनारे उमानंद मंदिर जाने वाले फेरी घाट की तरफ बढ़ रहा था तब तक एक बोर्ड दिखा। “गोहाटी मध्यम कांडा फेरी सर्विस”। हमने कहा बस इसी की तो जरूरत थी। ये सेवाएं दैनिक यात्रियों के लिए चलती है इसलिए काफी सस्ती होनी चाहिएं। मैंने उस गेट में बाइक घुसा दी। बाइक अंदर घुसाते ही सामने खुला मैदान था और उसके बाद नदी थी। नदी में एक तरफ एक छोटा सा कंक्रीट का प्लेटफार्म बना कर उसके ऊपर लचित बोरफुकान और उसके साथियों की मूर्तियां लगी हुई थी। लचित बोरफुकान अहोम साम्राज्य के बहुत बड़े सेनापति हुए हैं जिन्होंने मुगलों को नाकों चने चबा दिए थे और उनको पूर्वोत्तर में घुसने नहीं दिया। आज भी एनडीए में बेस्ट कैडेट को लचित बोरफुकान अवार्ड दिया जाता है। एक तरफ फ्लोटिंग घाट बना हुआ था। मैं मोटरसाइकिल लेकर उसमें घुस गया। थोड़ी देर में नाव आई तो मैं मोटरसाइकिल लेकर नाव में चढ़ने लगा। दरवाजे पर टिकट कंडक्टर बैठा हुआ था। चुंकि मुझे पता तो था नहीं कि कितने पैसे लगते हैं इसलिए मैंने उसकी तरफ सौ का नोट बढ़ा दिया। और शायद वह भी इस बात को समझ गया इसलिए उसने मुझसे तुरंत पूछा खुला दस का नोट नहीं है? मैंने तुरंत उससे सौ का नोट वापस लिया और 10 का नोट पकड़ा दिया। लेकिन यह क्या उसने उस ₹10 में से भी ₹3 वापस किए। यानी कि मोटरसाइकिल समेत ब्रह्मपुत्र पार करने का किराया कुल ₹7। कहां बिना मोटरसाइकिल के मैं ₹100 देने वाला था और कहां केवल सात और सात कुल ₹14 में अपना काम हो गया। बोट में बैठकर में नदी के नजारे लेने लगा। थोड़ी देर में एक मुढ़ी वाला आकर बोट पर ही अपना खोमचा से लगा कर मुढ़ी बेचने लगा मैंने भी ₹10 का एक दोना ले लिया और खाते हुए प्रकृति का आनंद लेने लगा। थोड़ी देर में ही बोट चल पड़ी और करीब 15-20 मिनटों में लहरों को चीरते हुए दूसरे छोर पर पहुंचा। दिया सुबह से कुछ नाश्ता भी नहीं किया था इसलिए बाइक लेकर नजदीक के बाजार में पहुंच गया। एक छोटी सी नाश्ते की दुकान में बैठा और पता किया कि नाश्ते में क्या उपलब्ध है। वहां पर रोटी और छोले उपलब्ध थे। मैंने साथ में एक आमलेट की बनवा लिया और आराम से बैठकर नाश्ते का आनंद लिया। नाश्ता निपटा कर फिर उसी रास्ते वापसी के लिए चल पड़े। ₹7 का टिकट लेकर बाइक समेत नाव पर सवार हो गया। लेकिन नाव के चलने में भी काफी समय बाकी था सो नाव के कोने में खड़ा होकर फोन में व्यस्त हो गया। अनायास ही निगाहें नदी के विशाल जल साम्राज्य की तरफ उठ जाती थी। तभी अचानक थोड़ी दूरी पर मुझे पानी में हलचल नजर आई। मैंने फोन के चक्कर में उस पर ध्यान नहीं दिया थोड़ी देर बाद निगाह उठाई तो वैसे ही हलचल दूसरी जगह हो रही थी। मैंने फोन को जेब में रखा और पानी पर ध्यान से देखने लगा। थोड़ी देर में मुझसे करीब 200 मीटर की दूरी पर एक बार फिर वही हलचल हुई और जो चीज नजर आई वह देख कर मैं उछल पड़ा। जी हां, वह एक फ्रेश वाटर डॉल्फिन थी। फिर तुम्हें फोन वोन भूल गया और लगातार पानी में डॉल्फिन्स को देखने लगा। थोड़ी देर में वो पानी में से अपनी लंबी थूथन निकालतीं और छोटी सी छलांग मार कर गुम हो जातीं। लगभग आधे घंटे बाद नाव वहां से खुली और तब तक मैं डॉल्फिन्स की अठखेलियों में ही गुमा रहा। मैंने गलती से भी फोटो लेने की कोशिश नहीं की, क्योंकि मुझे पता था कि इसका कोई लाभ नहीं होगा। चारों तरफ फैली अथाह जल राशि में डॉल्फिन कहां नजर आएगी कुछ पता नहीं था। और जब नजर आती तब कैमरा घुमाने का मौका दिए बिना पानी में गायब हो जातीं। नाव से उतर कर लगभग 12:00 बजे में होटल पहुंचा। वहां से फटाफट चेक आउट किया, अपना सामान लादा, गूगल गाइडेंस देवता को काजीरंगा नेशनल पार्क को लक्ष्य बनाने को कहा और उनके बताए रास्ते पर मोटरसाइकिल दौड़ा दिया। रास्ते में एक जगह निकॉन की एजेंसी नजर आई तो वहां रुक कर लगभग ₹3000 का एक ट्राइपॉड ख़रीदा। क्योंकि जैसा आपको पता है पिछला ट्राइपॉड पिछली रात को टूट चुका था। शहर की भीड़भाड़ से बाहर निकल कर नेशनल हाईवे नंबर 3 पकड़ कर मैं आगे बढ़ा। शानदार चार लेन की सड़क थी। अच्छी स्पीड मिल रही थी मैं बढ़ता चला गया। रास्ते में जगह-जगह सड़क के किनारे स्थानीय विक्रेता अनानास और संतरे बेच रहे थे। हालांकि मैंने दबाकर नाश्ता किया हुआ था लेकिन मुझे अनानास बहुत पसंद है इसलिए कुछ दूर जाने के बाद एक जगह रुका और बिना मोलतोल किए एक अनानास का ऑर्डर दे दिया। दुकानदार ने बढ़िया से उसको छील काटकर उसके टुकड़े करके मुझे दे दीए। मैंने पॉलिथीन पकड़ा और वही खड़े खड़े उससे बातें करते हुए सारा निपटा दिया। अब पेट में मामला गंभीर हो गया था इसलिए मैं एक बार फिर मोटरसाइकिल पर बैठा और आगे बढ़ा। बात की बात में मैं नगांव पार कर गया कालियाबोर पहुंचते-पहुंचते अंधेरा हो गया था और गूगल देवता अभी भी मेरा लक्ष्य 30 किलोमीटर दूर बता रहे थे। मैं बढ़ता रहा। थोड़ी देर बाद ही जंगल शुरू हो गया। जंगल में बड़े-बड़े नियंत्रित गति की चेतावनी के बोर्ड लगे हुए थे। हम भारत के एक बहुत ही महत्वपूर्ण अभ्यारण में प्रवेश कर चुके थे इसलिए वहां पर नियंत्रित गति में चलना बहुत ही महत्वपूर्ण था। अधिकतम गति 40 किलोमीटर प्रति घंटे की थी जिस का उल्लंघन करने पर न्यूनतम जुर्माना ₹5000 था। यही नहीं हर 1 किलोमीटर पर रंबल स्ट्रिप स्पीड ब्रेकर बने हुए थे जहां पर आपको वाहन 20 की स्पीड में चलाना था। मैं ठहरा नियम कानूनों को मानने वाला व्यक्ति। गति सीमा के अंदर गाड़ी चलाता हुआ उस जगह पहुंचा जहां पर गूगल महाराज ने कह दिया कि लो भाई तुम्हारा लक्ष्य आ गया। रात के लगभग 8:00 बजे जंगल के बीचो बीच मैं  बेवकूफ की तरह  खड़ा होकर आसपास देख रहा था। जब सिवाय अंधेरे और पेड़ों के और कुछ नहीं दिखा तो मैंने बाइक आगे बढ़ा दी। काजीरंगा नेशनल पार्क का कार्यालय और नजदीकी बाजार कोहरा वहां से लगभग 25 किलोमीटर है। लगभग 9:30 बजे मैं कोहरा पहुंचा। होटल में कमरा कम से कम 1800 का था। मैंने मोलभाव शुरू किया और अंत में वह कमरा मुझे ₹1000 में मिल गया। कमरा निस्संदेह बहुत ही शानदार था लेकिन मेरे बजट के बाहर था। मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था इसलिए मैंने ले लिया। सामान रख कर हाथ मुंह धोया और खाने की तलाश में बाहर निकला। हालांकि उस होटल में भी रेस्टोरेंट था लेकिन अपना सिद्धांत है कि जिस होटल में रुकिए उसमें खाना मत खाइए। होटल से करीब 100 मीटर दूर एक छोटा सा ढाबा मिला जहां पर तड़का रोटी और आमलेट का डिनर किया। वापस आया और बिस्तर के हवाले हो गया।

जै जै
संतरे अनानास की अस्थाई दुकान

महान योद्धा लचित बोरफुकान

टूरिस्ट क्रूजर

उमानंद मंदिर का द्वीप

शुक्रेश्वर महादेव

दूर से आती हमारी नाव

लो जी नजदीक आ गई

नाव पर सवार हमारा वृषभ

नाव पर झाल मुढ़ी

मांगी नाव न केवट आना

पानी को काटती हमारी नाव

दूर एक मंदिर

उस पार के दृष्य

उस पार के दृष्य






तड़का रोटी भुजिया चटनी प्याज



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